रूबरू | Part 25 | Rubaru – A Hindi Story of Love and Relationships

मायरा को बैठना भारी लगने लगा। वह उठकर बाहर की ओर बढ़ गई।

आलिया मैं आता हूं कहते ही ताबिश भी उठकर बाहर निकल गया।

क्या हुआ देखा नहीं गया। ताबिश तेज़ी से उसके साथ हुआ।

क्या देखा नहीं गया? वह अंजान बनी।

हमारी खुशी देखी नहीं जा रही?...

कौन सी खुशी?...

वह आलिया?...

ऐसी-ऐसी खुशियों को मैं आंख उठाकर भी नहीं देखते।

मायरा मुंह बनाती आगे बढ़ गई। और ताबिश वहीं खड़ा रह गया।

कोई और वक्त होता तो वह उसे अच्छे से सुना देता। लेकिन इस वक्त उसे मायरा की बात बुरी नहीं लगी।

वह मुस्कुराता हुआ अपने कमरे में चला गया। फोन निकाल कर पहले मैनेजर को फोन करता है। फिर मिस्टर सुब्हान को फोन करके अपने कमरे में बुलाता है।

थोड़ी देर बाद मिस्टर सुब्हान उसके सामने बैठे हुए थे।

दुश्मनों की कोई खबर?... 

पुलिस पता लगा रही है। बहुत जल्द पता चल जायेगा।  मिस्टर सुब्हान ने जानकारी दी।

और मिस मायरा?...

मिस मायरा पर हमारी पूरी नज़र है। लेकिन इन्होंने अभी तक कुछ भी ऐसा नहीं किया जिससे उनके मकसद के बारे में जान सकें।

मिस्टर सुब्हान ने अपनी बात रखी।

स्टाफ से वह दानिश के बारे में पूछ रही थी।

क्या? मिस्टर सुब्हान हैरान हुए।

जी, वह अगर यहां दानिश के लिए आई है तो क्यों आई है? हमें यह हर हाल में जानना है। 

ताबिश ने अपनी चिंता ज़ाहिर की।

आपने कभी बातों के दौरान जानने की कोशिश नहीं की? मिस्टर सुब्हान सिर झुकाकर धीरे से बोले। 

वह कैमरे में कई बार उस दोनों को साथ देख चुके थे। लेकिन वह मालिक थे। उन्हें इस तरह सवाल करने का हक नहीं था। लेकिन उन्हें सारी बातों को जानना भी ज़रूरी था। इसलिए वह पूछ बैठे।

नहीं...

ताबिश ने कुछ और कहना मुनासिब नहीं समझा।

ठीक है।

मैं चलता हूं। वह उठ खड़े हुए।

हमारी नज़र दुश्मनों पर टिकी हुई है सर। बहुत जल्द दुश्मन हमारे कदमों में होंगे।

जब तक मिस मायरा के यहां आने का मकसद पता नहीं चल जाता। वह भी हमारे दुश्मनों की लिस्ट में हैं।

कहते ही मिस्टर सुब्हान बाहर निकल गए।

लेकिन जाते-जाते बहुत गहरी बात कह गए।

आप सही कह रहे हैं मिस्टर सुब्हान... 

जब तक मायरा के यहां आने का मकसद मालूम नहीं हो जाता। तब तक वह हमारे दुश्मनों में से है।

मिस्टर सुब्हान के जाते ही ताबिश मन ही मन सोचता है।

मुझे उससे दूरी बनाकर रखनी होगी। मुझे अपने दिल पर काबू रखना होगा। 

वह सोफा हेड पर सिर टिकाकर आंख बन्द कर लेता है।

उसकी आंखों के सामने मायरा का चेहरा था। वह उसके साथ बिताए हुए लम्हों में खो गया।

मिस मायरा हमारे दुश्मनों की लिस्ट में हैं...उसके कानों में मिस्टर सुब्हान के अल्फाज़ गूंजते हैं।

मेरे दुश्मन के लिए मेरे दिल में कोई जगह नहीं है। 

तभी वह एक झटके से उठ खड़ा होता है।

मायरा तुम मेरे घर में भले ही आ गई हो। लेकिन मेरे दिल में तुम्हारे लिए कोई जगह नहीं है।

ताबिश शायद खुद को समझा रहा था। 

वह कमरे से निकल कर सीधा ऊपर स्टडी रूम में चला गया।

रंगों से खेलते हुए वह सब कुछ भूल चुका था। या शायद भूलने के लिए उसने रंगों का सहारा लिया था।

उसकी हमेशा से यही आदत थी। जब भी वह उदास या परेशान होता पेंटिंग बनाने लगता। 

रंगों में डूबकर वह अपने आसपास और यहां तक कि खुद से भी बेखबर हो जाता था।

...

मायरा दादी के पास बैठी किताब पढ़ कर उनको सुना रही थी। लेकिन उसका मन बार-बार ताबिश की ओर जा रहा था।

अभी तक नहीं आए डिनर करके। लगता है आलिया उनके लिए बहुत खास है तभी तो पूरा रेस्टोरेंट बुक कर दिया।

आलिया का मन एक बार फिर भटक कर ताबिश की ओर चला गया।

बहुत रात हो गई जाओ अब सो जाओ।

तभी दादी उसके चेहरे की ओर देखकर कहती हैं। वह बहुत देर से देख रही थी कि मायरा किताब पढ़ तो रही है। लेकिन उसका ध्यान किताब में कम है।

जी, दादी...

वह तुरंत उठ गई। वह खुद ही उठना चाह रही थी। लेकिन  दादी की वजह से बैठी हुई थी। 

तभी दरवाज़े पर दस्तक देकर ताबिश अंदर आता है।

मायरा भी दरवाज़े की ओर ही बढ़ रही थी।

दोनों के कदम रूकते हैं।

दोनों की निगाहें मिलती हैं।

और फिर...

दोनों ही अपने कदम बढ़ा देते हैं।

दरवाज़ा खोल कर मायरा बाहर निकल गई।

और ताबिश दादी के पास जाकर बैठ गया।

परेशान क्यों हो?...दादी ने सीधी बात की।

पता नहीं...

आलिया के साथ का प्रोग्राम भी कैंसिल कर दिया। दादी की नज़र लगातार उसके चेहरे पर थी।

वह तो बस ऐसे ही बन गया था। ताबिश लापरवाही से बोला।

मायरा को जलाने के लिए...दादी ने बात पूरी कर दी।

वह खामोशी से दादी की ओर देखता है।

मतलब आप अंजान नहीं हैं। कैसे आप मेरा मन पढ़ लेती हैं। ताबिश अपने ही ख्यालों में खो गया।

ऐसा कुछ नहीं दादी... प्रोग्राम तो बनाया था। लेकिन अचानक से एक काम आ गया था। उसने दादी को टाला।

आलिया नाराज़ होकर गई है। दादी ने खबर दी।

उसे और आता क्या है...ताबिश उकताया।

आलिया को छोड़ें, यह बताएं आपने खाना अच्छा से खाया? ताबिश ने बात बदल दी।

हां, खा लिया। तुमने खाया कि नहीं? 

दादी को उसके खाने की फिक्र हुई। डिनर टाइम उन्होंने उससे पूछा था। लेकिन उस वक्त ताबिश का खाना खाने का बिल्कुल भी मन नहीं था।

नहीं, मैं कुछ खा लूंगा। आप चिंता न करें। 

ताबिश ने दादी को यकीन दिलाया।

बात परेशानी वाली है...नकली ज्वेलरी का खेल भी हमारे दुश्मन का ही था। 

क्या मतलब? दादी हैरान हुईं।

हमारे मैनेजर को धमकी मिली थी। इसीलिए वह क्लाइंट यहां तक पहुंच पाए।

मैनेजर डर कर दूसरे शहर चला गया। ताकि उस पर आंच न आए।

लेकिन सख्ती करने में उसने बताया कि उसे धमकी मिली थी कि अगर तुमने यह मीटिंग तय नहीं कि तो उसके बेटे को मार दिया जायेगा।

ताबिश ने पूरी बात बताई।

मतलब दुश्मन को पता था कि तुम्हें हीरों की जानकारी नहीं है। मैनेजर को धमकी देकर हटा दिया। ताकि तुम ऐसे सारी ज्वेलरी का सौदा कर लो। दादी ने बात को गहराई से समझा।

हां, वह अपने काम में कामयाब भी हो जाते। अगर वहां पर मायरा न आती।

ताबिश मन ही मन मायरा का शुक्रिया अदा करता है। उसकी वजह से वह बहुत बड़े नुकसान से बच गया था।

हालांकि उसने इस बात के लिए एक बार भी मायरा का शुक्रिया अदा नहीं किया था।

उन्होंने किसके कहने पर यह काम किया है। अभी इस बात का पता नहीं चल पाया है। लेकिन बहुत जल्द पता चल जायेगा। पुलिस काम कर रही है।

ताबिश ने सारी बातें बताई।

कौन हो सकता है हमारा दुश्मन?...आपको कुछ अंदाज़ा है। 

ताबिश ने दादी से जानना चाहा।

ऐसा कोई तो मेरी नज़र में नहीं। जिसके साथ हमने कभी बुरा किया हो। 

पता नहीं यह कौन है। जो हमारी जानों का दुश्मन हो गया है।

दादी दुख से बोली।

एक बार यह मेरे सामने आ जाए। फिर वह ज़िंदा नहीं बच पाएगा।

ताबिश गुस्से से बोला।

पुलिस को अपना काम करने दो। तुम कानून को अपने हाथ में मत लो। दादी ने जल्दी से समझाया।

आकिल की मंगेतर से बात हुई? दादी ने बात बदल दी।

जारी है...

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